हम छोटी – छोटी परेशानियों को अनदेखा करके बड़ी बीमारियों को निमंत्रण देते हैं

लंबी बीमारियाँ (Chronic diseases) होने के अधिकतर कारण जन्म से ही मौजूद रहते हैं । लेकिन ये बीमारियाँ तुरन्त सामने नहीं आती । हमारे शरीर के विभिन्न अंग इन कारणों से धीरे – धीरे लकड़ी में दीमक लगने की तरह नष्ट होते रहते हैं । शुरुआत से ही छोटी-छोटी परेशानियाँ छोटी उम्र (बच्चों) में ही सामने आने लगती हैं । लकिन हमें ( डॉक्टर्स को ) इनका ज्ञान न होने के कारण हम इस ओर सोचते ही नहीं हैं । बच्चों के शारीरिक एवं मानसिक विकास में कमी (Delayed Milestones), बच्चों के व्यवहार की समस्याऐ (जैसे : आक्रामक व्यवहार = ADHD) , स्कूल में पढ़ाई में पिछड़ना , मोटापा , वजन न बढ़ना , लम्बाई का कम रह जाना , बालों का अधिक झड़ना , बार-बार खांसी जुकाम एवं गले का खराब होना , दस्त लगना , बुखार आना । नजर का कमजोर होना ( चश्मा लगना ) , बड़े होने पर थकान (Fatigue), शरीर में दर्द (Aches & Pains), माहवारी की परेशानी , सिर दर्द , दांतो की बीमारी । हम इन सभी परेशानियों में लक्षणों के आधार पर इन्हे नियंत्रित करने का प्रयास करते हैं । जानकारी के अभाव में शुरुआत में परेशानियों के मूल कारणों को ख़त्म नहीं किया जा रहा है ।

इन कारणों के मौजूद रहने से धीरे – धीरे शरीर के विभिन्न अंग कमजोर होते चले जाते हैं । धीरे -धीरे उन अंगो की बड़ी बीमारियाँ भी सामने आने लगती हैं । हमें यह याद रखना होगा कि चाहे कोई छोटी या बड़ी परेशानी हो या न हो । लकिन हम और हमारे बच्चे इन कारणों के मौजूद रहने से भयंकर बीमारियों की तरफ बढ़े चले जा रहे हैं । हमें यह सोचना होगा कि जो बीमारी अक्सर पचास साल के बाद होती थी । वें युवक , युवतियों एवं युवाओँ में सामने क्यों आ रही हैं । गुर्दे एवं पित्त की थैली में पथरी हो या फिर डायबिटीज एवं हाई ब्लड प्रेशर । तीसरे दशक तक आते – आते ये बीमारियाँ दिखाई देने लगती हैं । हमें इन्हे पहले दशक में ही रोकना होगा । स्वयं एवं देश हित के लिए इस ओर ध्यान देना ही होगा । इन सभी कारणों की विस्तृत जानकारी चिकित्सकों को होते ही ये सब कारण शुरुआत में ही खत्म होने लगेंगे ।