सरकार एवं मैडीकल कौंसिल (MCI) से अपील

  1. हमारे चिकिस्ता पाठ्यक्रम में कुछ आधारभूत चीजों और लंबी बीमारियों (Chronic Diseases) के कारणों को शामिल किया जाये । जिससे कि हम अपने मरीजों की बीमारियों में इन कारणों को सोच सकें । असामान्य होने पर लक्षणों के साथ – साथ इन कारणों का इलाज कर सकें ।
  2. हमें यह बताया जाये कि स्वस्थ व्यक्तियों ( जिनमें बीमारी के लक्षण अभी नहीं है ) में ये कारण कितने प्रतिशत व्यक्तियों में है । (Prevalence of causes in normal population)
  3. हमारी लैब की विभिन्न रिपोर्ट का सामान्य स्तर (Normal Value) हमारे स्वस्थ होने को नहीं दर्शाता  है । इनके साथ स्वस्थ स्तर (Optimal Value) भी सामान्य स्तर (Normal Value) के साथ अलग से दिया जाये ।
  4. इन बीमारियों के कारण सही तरह से मालूम नहीं है । इन शब्दों (Primary / Idiopathic / Essential) को हमारी क़िताबों (Medical Books) से क्यों न हटा दिया जाये ?

सरकार एवं मैडीकल कौंसिल से अपील क्यों ?

  1. हम इन बीमारियों को आनुवांशिक (Hereditary / Familial / Genetic) या अपने पूर्वजों से विरासत में मिला हुआ मान लेते हैं । इनमें से अधिकतर बीमारियों को हम बहुत समय तक काफी हद तक इन कारणों को दूर करके बचा सकते हैं या बहुत समय तक नियंत्रित रख सकते हैं ।
  2. इन बीमारियों के प्रकट होने के लिए एक से अधिक कारण होते हैं । हमें इन सभी (Multifactorial) कारणों को अच्छी  तरह समझकर एक साथ दूर करना होगा । यदि हम केवल एक कारण दूर करेंगे तो बीमारी ठीक नहीं होगी ।
  3. ये कारण दशकों तक मौजूद रहने के बाद भी हमें बीमारी के लक्षण नहीं आते, इसे अच्छी तरह से समझना होगा।
  4. लैब की दो नार्मल वैल्यू देने का फायदा यह होगा कि यदि उन दोनो के बीच के स्तर पर टैस्ट की रिपोर्ट आती है तो उन कारणों को और अधिक सावधानी से करने के लिए व्यक्ति को कह सकते हैं । उसे दवाईयों की जरूरत अभी नहीं है । क्योकि वह बीमारी होने और लक्षण प्रकट होने के बहुत पास आ चूका है । उन कारणों को खत्म करने के लिए वह मानसिक रूप से तैयार हो जायेगा ।