लम्बे समय तक कारणों के मौजूद रहने के पशचात भी हमें कोई परेशानी नहीं होती क्यों ?

लंबी बिमारियों ((Chronic Diseases) को सही तरह से समझने के लिये हमें पहले इस बात को अच्छी तरह से जानना होगा कि ये धीरे – धीरे बहुत सालों ( कई दशक ) बाद क्यों पता चलती हैं । इनके होने वाले कारण हमारे शरीर में बहुत सालों पहले मौजूद रहते हैं । लेकिन हमे इसका पता नहीं चलता । क्यों ?

यह मुख्यत : दो कारणों की वजह से होता है । एक तो हमारी शारीरिक अंगो की क्षमताऐ , जो जरूरत की कई गुना होती हैं । धीरे – धीरे जब हमारे कुछ अंगो की क्षमता हमारी जरूरतों से कम हो जाती हैं तभी उन अंगो की परेशानी सामने आती है । उदाहरण के लिए हमारे दो गुर्दे होते हैं । एक गुर्दा बीमारी से पूरा खत्म हो जाये और दूसरा भी आधा निकाल दिया जाये तो भी गुर्दे के सामान्य कार्य होते रहेंगे । यदि हम ब्लड यूरिया टैस्ट कराते हैं तो वह भी सामान्य आयेगा ।

लंबे समय तक बीमारी का पता न चलने का दूसरा मुख्य कारण है हमारे शरीर की वह अदभुत क्षमता जो कि हमारी बहुत सी चीजों को एक सामान्य स्तर पर रहने का प्रयास करती है । चाहे हम उसे कम ले या ज्यादा लें । इस क्षमता को होमियोस्टेसिस करते हैं । उदाहरण के लिए हमारे शरीर का तापमान , खून की शुगर और कैल्शियम का स्तर । इनका जरा सा भी कम या अधिक स्तर हमारे शरीर की गतिविधियों को अनियंत्रित कर सकता है । इन्हे एक खास स्तर पर रखने की हमारे शरीर के अन्दर अदभुत छमता  है । लेकिन जब बहुत लंबे समय तक असंतुलन जारी रहता है तो यह प्रणाली असफल होने लगती है और हमें बीमारियों के लक्षण प्रकट होने लगते हैं ।

अधिकतर कारण हमारे शरीर में जन्म के बाद से ही मौजूद रहते हैं । जैसे – जैसे हम बड़े होते हैं , इन कारणों की वजह से छोटी – छोटी समस्याऐ आने लगती हैं । लेकिन ये समस्याऐ आने लगती हैं । लेकिन ये समस्याऐ इतने अधिक व्यक्तियों में हैं  कि हम उन्हें सामान्य मान लेते हैं  और उनका अस्थायी समाधान निकाल लेते हैं । उसे अनदेखा करने लगते हैं । धीरे – धीरे , हमारे बहुत जरुरी अंगो के लिये आवश्यक , जरुरी चीज़े अन्य कम जरुरी अंगो से ले ली जाती हैं । जब यह प्रकिया काफी लंबे समय तक रहती है , तो उन कम जरूरी अंगों की परेशानियाँ बड़ी बीमारी के रुप में हमारे सामने आने लगती हैं ।