लम्बी बीमारियाँ कई दशकों पहले शुरू हो जाती हैं

लम्बी बीमारियाँ (Chronic diseases) अक्सर 30  साल के बाद पता चलती हैं । लकिन इनकी शुरुआत  बच्चे के पैदा होने से पहले ही हो जाती है । सभी लम्बी बीमारियाँ जैसे डायबीटिज , हाई ब्लड प्रेशर ,कैंसर ,थायराइड,जोड़ों की बीमारी आदि की शुरुआत पता चलने के बहुत सालों पहले हो चुकी होती है । बीमारी के बढ़ने की रफ़्तार हर समय (जब तक उसका पता चलता है और उसके बाद भी) एक जैसी रहती है । इसे हम एक साधारण उदाहरण से समझ सकते है । एक ट्रेन जो देहली से चलकर मुम्बई 24 घण्टे में पहुँचती है । मुम्बई पहुचने के कुछ मिनट पहले भी यदि कोई पूछता है कि ट्रेन मुम्बई में है  तो उत्तर यही आयेगा कि वह मुम्बई में नही है। वह देहली से मुम्बई पहुँचने तक एक ही रफ़्तार  से बढ़ रही है ।

यदि हम छाती के कैंसर (Breast Cancer) का उदाहरण लें तो एक सामान्य कोशिका से कैंसर कोशिका बनने में ही कई साल ( दशकों तक ) लग जाते हैं । हम इसे किसी भी विधि से पता नहीं कर सकते । जल्दी से जल्दी छाती के कैंसर का पता मैमोग्राफी (Mammography) से होता है । इससे पता करने के लिये दस खरब कोशिकाओं की गाँठ का होना जरुरी होता है । इससे कम पर इसका पता नहीं चल पाता । एक कोशिका से दो कोशिका बनने में एक से तीन महीने लगते हैं । इसी तरह फिर दो से चार कोशिकाएँ बनने में अन्य एक से तीन महीने लगेंगे । इस तरह दस खरब (1 Billion) कोशिकाऐ बनने में 30 बार (30 Divisions) कोशिकाओं को टूटना होगा । इस तरह छाती के कैंसर की शुरुआत से उसे जल्दी से जल्दी पता चलने में कम से कम 5 – 10 साल लग जाते हैं । सोचिए कि हमने तीन या चार महीने पहले मैमोग्राफी कराई होती तो कैंसर उसमे नहीं आता । इसी तरह से अन्य बीमारियाँ भी शुरुआत होने से लेकर पता चलने तक 20 – 40 साल ले लेती हैं । जबकि उनके बढ़ने की रफ़्तार हर समय एक जैसी रहती है । हम इन बीमारियों को किसी भी समय कारणों को दूर करके आगे बढ़ने से रोक सकते हैं । उन्हें काफी हद तक सामान्य अवस्था की ओर ला सकते हैं ।

“जब जागो तभी सवेरा “