मिशन हैल्थ (Mission Health) का सफर

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मेडिकल शिक्षा पूर्ण होने के पशचात एक बात मन मे थी कि हम चिकित्सको को जीवन शैली की बीमारियाँ  (Chronic Life Style diseases) नहीं होनी चाहिये | हमे हर वह सावधानी लेनी चाहिये जो बीमारी न होने के लिये आवश्यक है । 12 वर्षो पशचात हाई ब्लड प्रेशर की बीमारी होने पर दोबारा सोचा कि  क्या गलत हो रहा है हमारी जीवन शैली मे | उन सभी चीजों को ठीक करने और समाज मे जागृति लाने क़े लिए इण्डियन मैडिकल ऐसोसिएशन शामली ने स्वास्थ्य जागरूकता अभियान चलाया।समय समय पर विभिन्न विषयों पर पैम्पलैट वितरण और स्थानीय अखबारों मे विभिन्न लेख दिए गये | इस कार्य मे विभिन्न सामाजिक एव अन्य सस्थाओं से अपार जनसमथर्न एव  सम्मान मिला । यह अभियान  पिछले बारह वर्षो से सतत जारी है ।

यह सब करते हुए चार वर्षो पशचात हमे महसूस हुआ क़ि हम चिकित्सको को बहुत कुछ मालूम नहीं है । हमे बहुत कुछ जानना चाहिये । हमारी मेडिकल की उच्च किताबो मे बहुत कुछ नहीं है। बहुत सी ऐसी चीजे है जो अति महतवपूर्ण है लकिन उन्हें हमारी किताबो मे स्थान नहीं मिला है | बहुत सी महतवपूर्ण चीजों को बहुत कम बताकर छोड़ दिया गया है । उन्हें विस्तार से नहीं दिया गया है । न ही बताया गया है क़ि वे बीमारी न होने और बीमारी होने के बाद उनसे ठीक होने के लिए कितना महतवपूर्ण है । न ही यह बताया गया है कि कुछ महतवपूर्ण चीजें समाज के स्वस्थ लोगों में कितने प्रतिशत लोगों में असामान्य है ।

सात वर्ष पूर्व इन सभी चीजों को हमने प्रायोगिक रूप से करने का निर्णय लिया । इन्हे अपनी इंडियन मेडिकल आर्गेनाइजेशन की सभा मे उठाया । लेकिन इसमे बड़ी परेशानी सामने आई कि इन सभी चीजों को ठीक करने के बाद भी इनका परिणाम तुरंत सामने नहीं आना था । , इसलिए बहुत कम लोग ही इनका विशवास कर सके । जिन्हे कोई परेशानी नही थी , उन्होंने इस पर कोई भी ध्यान नहीं दिया । हमारे साथी चिकिस्तकों ने भी इस पर विशेष ध्यान नहीं दिया । सबसे बड़ी परेशानी यह थी कि हम लोगों (डॉक्टर्स) को ख़ुद यह नहीं पता था  कि इन बीमारियों के कारण दशकों तक मौजूद रहने के बाद भी इन बीमारियो के लक्षण हमे नहीं आते । इन्हे ख़त्म करने के सालों बाद भी हमें लक्षणों मे आराम या दवाई की मात्रा में प्रभाव नहीं पड़ता । बीमारी आती भी धीरे-धीरे है और जाती भी धीरे-धीरे है।

चार वर्ष पूर्व शामली की कुछ’ सामाजिक संस्थाओं और डॉक्टर्स ( IMA , NIMA ) ऐसोसिएशन के साथ मिलकर जीवन शैली में बदलाव ( Life Style Modification ) अभियान शुरू किया गया । इनमे मुख्यत : उन व्यक्तियों को लिया गया । जिन्हें बीमारियाँ थी । उनका पूरा मेडिकल रिकार्ड लिया गया । इसके पशचात रोजाना एक घंटा की योग कक्षा एव उसके पशचात 5 मिनट के लिए कुछ मेडिकल टिप्स , जीवन शैली मे बदलाव के लिए दिए गए । इसमे हमने कुछ बड़ी लैब ( रैनबैक्सी एव लाल पैथ लैब ) को भी जोड़ा । उनसे कुछ मैडीकल टैस्ट ( विशेषत : विटामिन डी ) पचास प्रतिशत कम की दर पर कराये गये । इनमे कुछ चीजो की पुष्टि  हुई । एक वर्ष पशचात ही हमें महसूस होने लगा क़ि ऐसा और भी बहुत कुछ है जो हमारी मेडिकल की किताबों मे नहीं है और हम सभी डॉक्टर्स के लिए ये सब जानना अति आवश्यक है । दो वर्षो के पशचात ही जिन व्यक्तियों ने उन कारणों को सही तरीके से खत्म किया उनमे से कुछ मे आश्चर्यजनक रूप से परिवर्तन आने लगे । हमारे कुछ साथी डॉक्टर्स ने अपने परिवार और कुछ मरीजों में इनको अपनाया और अनुकूल परिणाम सामने आये । इसी बीच 3 वर्ष पूर्व रैनबैक्सी लैब ने विटामिन डी के टेस्ट को पूरे भारत वर्ष में उन्ही रियायती दरों पर किया और प्रचार सामग्री डॉक्टर्स को दी । आज विटामिन डी की कमी की जागरूकता पूरे भारतवर्ष मे है ।

3 वर्ष पूर्व ही हमें आभास होने लगा था कि हम इन सभी कारणों को दूर करके इन बीमारियो को आगे बढ़ने से रोक सकते है और उन्हें काफी हद तक कम भी कर सकते है । दवाई की मात्रा को भी काफी कम कर सकते है । डायबीटिज , हाईब्लड प्रेशर , थायरॉइड एव अन्य बिमारियों के आलावा आलावा कुछ ख़तरनाक बीमारियो में भी इसके परिणाम चौकाने वाले रहे । एक वर्ष पूर्व ही हमने मिशन हैल्थ को उच्च स्तर पर उठाने का निर्णय लिया । इस कार्य के लिए हमारी सभी आई o एम o ए o डॉक्टर्स के साथ नीमा डॉकटर्स ( NIMA ) ने भी सहयोग एव समर्थन दिया । इसके पशचात इंटरनेट ( Face Book ) पर विभिन्न डॉक्टर्स के ग्रुप में इसे शेयर किया । उनके समर्थन एव उत्साहवर्धन के पशचात इसे जनसमर्थन के साथ एक बदलाव के लिए हम इसे पूरे भारतवर्ष
में करने के लिये प्रतिबद्ध हैं ।

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