कैसे जल्द पता करें बीमारियों को ?

हम इंतजार करते हैं गंभीर बीमारियाँ होने का । हमारे पास मरीज छोटी-छोटी परेशानियों में आता है । हम उसका टैस्ट भी कराते हैं । टैस्ट की रिपोर्ट  भी आती है । लकिन हमारी टैस्ट की नार्मल वैल्यू सही न होने के कारण हम बीमारी का पता जल्द नहीं कर पाते ।

टैस्टों की जो सामान्य सीमायें निर्धारित की गई हैं । उनमे 95 प्रतिशत सामान्य व्यक्तियों के अनुसार की गई हैं ।जिसमें उन सीमाओं के अन्दर कोई परेशानी या लक्षण नहीं होता । इन व्यक्तियों में बीमारी की प्रथम और दूसरी स्टेज (अवस्था ) वाले वे मरीज भी आ जाते हैं जिन्हे लक्षण नहीं होते हैं । लकिन बीमारी धीरे – धीरे अन्दर ही अन्दर बढ़ रही है । हमें इनका पुनः निर्धारण करना होगा । इन्हे अति सामान्य (Functional Range = Optimal) बनाना होगा ।

किसी भी बीमारी का पता लगाने के लिये जब हम टैस्ट कराते हैं तो उसकी कोई एक नार्मल वैल्यू नहीं होती । बल्कि ये एक रेंज (Normal Range) होती है । जिसकी ऊपरी और निचली सीमा (Upper Unit / Lower Unit) होती है । उदाहरण के लिए

ब्लड शुगर ( बिना खाये ) N-Value                                = 70 – 110 mg%
टीo एसo एचo (TSH) हार्मोन                                      = 0.3 – 5.5 uiu / ml
यदि हम इसका पुनः निर्धारण करे ( अति सामान्य = Optimal Value ) तो इनका स्तर निम्न होगा ।
ब्लड शुगर ( बिना खाये )                                              = 70 – 90 mg%
टीo एसo एचo (TSH)                                                 = 0.3 – 3.0 uiu / ml

इन गणनाओं के अनुसार ब्लड शुगर बिना खाये 90 से अधिक है तो असामान्य है और TSH 3 से 5-5 uiu/ml भी असामान्य है । टैस्टों के ये नई सीमायें Optimal Value / Functional Value कहलाती है । इनके और सामान्य स्तर ( जो अभी रिपोर्ट में दिया जा रहा है ) के बीच के व्यक्तियों को चाहे लक्षण न हो । लेकिन वें बीमारी की तरफ काफी आगे बढ़ चुके है । उन्हें दवाईयों की अभी जरुरत नहीं है । लेकिन हम कारणों को दूर करके उन्हें बीमारी की ओर आगे बढ़ने से रोकने के लिये सावधान कर सकते हैं । इनसे हम ऐसे बहुत से व्यक्ति जिन्हे अगले कुछ सालों में बीमारी के लक्षण आने हैं , उन्हें बीमारी से बचा सकते हैं ।