कैंसर के इलाज में बदलाव आवश्यक क्यों ?

 

कैंसर का पता चलने के बाद हमारे पास उससे लड़ने के तीन उपाय हैं। पहला सर्जरी , उसे निकाल देना। दूसरा कीमोथेरेपी – दवाईयों से कैंसर कोशिकाओं को खत्म करना। तीसरा रेडियोथेरेपी – किरणों से ट्यूमर को नष्ट करना। क्योंकि अधिकतर कैंसर के सही कारण मालूम नहीं है। इसलिए हम कारणों को जानने और ठीक करने के बारे में सोचते भी नहीं हैं। लेकिन सर्जरी के अलावा बाकी दोनो इलाज से कैंसर कोशिकाओं के साथ – साथ हमारे सामान्य शरीर को भी अत्यन्त हानि पहुँचती है। शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी कम होती है।

कैंसर का पता चलने के बाद मरीज को जीने के संभावना कितनी होती है। यह बहुत सी बातों पर निर्भर है। हर प्रकार के कैंसर में यह अलग -अलग होती है । मान लीजिये किसी कैंसर के 100 मरीजों में 5 साल तक जीने की संभावना 60% रोगियों की है। लेकिन 10% रोगी 10 साल से भी अधिक जीते हैं और 2%रोगी 20 साल से भी अधिक जीते हैं । हमें यह सोचना होगा की हम कैसे अधिकतर मरीजों को 20 साल से भी अधिक जीने की संभावना वाली श्रेणी में ले आयें। साथ ही उसके जीवन जीने की गुणवत्ता को कैसे बढ़ाएं। कुछ बहुत ही आधारभूत (BASIC) चीजों को अपनाकर हम ऐसा कर सकते हैं। लेकिन हमारी उच्च किताबों में यह सब नहीं है। क्यों हम इन आधारभूत चीजों को अमल में नहीं ला रहे हैं।

कैंसर के तेजी से बढ़ने और उसके शरीर के अन्य भागों में पहुँचने (Metastasis ) के कुछ सामान्य कारण है जो अधिकतर हम सभी (90% से अधिकतर सामान्य लोगों ) में भी मौजूद हैं। शोध कार्य इन कारणों से भरे हुए हैं। यदि हम इन तीनों इलाज के कारणों के साथ इन कारणों को भी ठीक कर लें तो मरीज की इन खतरनाक इलाज को सहने की क्षमता बढ़ जायेगी ।इलाज के बाद उसकी जिन्दा रहने की सम्भावना अधिक हो जायेगी। कैंसर के उस जगह से दूसरी जगह फैलने (metastatis) की संभावना काफी कम हो जायगी।