इलाज को बदलना आवश्यक क्यों ?

कैसे होता है इलाज :किसी भी बीमारी के होने पर उसका इलाज दो तरीके से किया जाता है । उससे होने वाली परेशानियाँ (लक्षण) और उसके कारण । हमें लक्षणों के साथ उन कारणों को भी खत्म करना चाहिये जिसकी वजह से परेशानी हुई । उदाहरण के लिए – मलेरिया बुखार होने पर हमें तापमान काम करने की दवाई (क्रोसिन = पैरासिटामोल ) देते हैं । लकिन साथ ही साथ मलेरिया के कीटाणुओं को ख़त्म करने की दवाई भी देते हैं , जिसकी वजह से हमें बुखार हुआ । सोचिये कि यदि हम केवल बुखार उतारने की दवाई ही दें और मलेरिया के कीटाणुओं को खत्म करने की दवाई न दें तो क्या होगा । हमारा बुखार तो कुछ समय के लिए कम हो जायेगा और हम ठीक भी महसूस करेंगे । लकिन , मलेरिया के कीटाणु हमारे शरीर के सभी अंगो में फैलते चले जायेंगे । हमारे अंग कमजोर होते जायेंगे । हमें तापमान बढ़ने के साथ -साथ उन अंगो की परेशानियाँ भी होती जायेंगी । जैसे पीलिया , खून की कमी , उल्टी होना , बेहोशी आदि । इसके पशचात हमारे बुखार पर क्रोसिन (पैरासिटामोल) भी असर नहीं करेगी ।

लम्बी बीमारियों में कैसे हो रहा है इलाज ?: :लंबी बीमारियों (Chronic Diseases) को हमारी उच्च किताबों (Standard Books) में लिखा है कि ये Primary / Idiopathic /Essential हैं । मतलब यह है कि इनका सही कारण मालूम नहीं है । हमने मानसिकता बना ली है कि इनका कारण नहीं पता है । हम इन सभी बीमारियों (डायबिटिज , हाई ब्लड प्रेशर , थायराइड की बीमारी , मानसिक बीमारी ,जोड़ो और हडिड्यों की बीमारी , कैंसर आदि ) में केवल इनके लक्षणो का इलाज कर रहे हैं । उदाहरण के लिये – डायबिटिज में शुगर कम करने की और हाई ब्लड प्रेशर में  ब्लड प्रेशर कम करने की दवाई दे रहे हैं । लकिन हमारी शुगर क्यों बढी या हमारा हाई ब्लड प्रेशर क्यों बढा , इसके लिये उन कारणों को हम नहीं सोचते और न ही उन्हें दूर करने की कोशिश करते हैं । इन कारणों को दूर न करने की वजह से ही ये बीमारियाँ धीरे -धीरे बढ़ती जाती है । कुछ समय पशचात अन्य अंगों पर उनके बुरे परिणाम सामने आने लगते हैं । वास्तव में जिन कारणों की वजह से हमें डायबिटिज या हाई ब्लड प्रेशर हुआ ,उन कारणों से केवल ये ही बीमारियाँ नहीं होती , वरन अन्य बहुत सी बीमारियाँ होती हैं । इन कारणों को दूर न करने से कुछ समय पशचात अन्य बीमारियों के लक्षण भी सामने आने लगते हैं । इसके पशचात उन लक्षणों को दबाने के लिए अन्य दवाइयाँ भी शुरू हो जाती हैं ।

कैसे बदल जायेगा इलाज ?: :यदि हम डायबिटिज और हाई ब्लड प्रेशर का उदाहरण लेते हैं तो जो अब तक इलाज चल रहा है वह उसी तरह से चलेगा । डायबिटिज में शुगर कम करने और हाई ब्लड प्रेशर में ब्लड प्रेशर को कम करने की दवाई उसी तरह से उतनी ही आवश्यकतानुसार चलेगी । इन दवाईयों के साथ उन सभी कारणों को एक साथ दूर करना होगा । जैसे – जैसे ये कारण खत्म होंगे तो हमारी दवाई की मात्रा भी बढ़नी बंद हो जायेंगी । कुछ समय पशचात कम से कम दवाईयाँ रह जायेंगी । बहुत से मरीजों में दवाईयाँ बिल्कुल ख़त्म हो जायेंगी । सबसे बड़ा लाभ हमें होगा कि हम भविष्य में होने वाली उन खतरनाक बीमारियों और परेशानीयों से बच जायेंगे जो हमें कुछ ही समय पशचात होने वाली थी । इससे भी बड़ा लाभ हमें अपना जीवन जीने की ऊर्जा में मिलेगा । हमारा कार्य करने का उत्साह और ऊर्जा बहुत अधिक बढ़ जायेगी ।

इसी तरह से अन्य बीमारियों जैसे – थायराइड की बीमारी , जोड़ों और हड्डियों की बीमारी , नींद न आना , मानसिक बीमारी , कैंसर आदि में इलाज एवं परिणाम बदल जायेंगे ।